अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट की पहली बैठक बुधवार (19 फरवरी 2020) को हुई। बैठक दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित ट्रस्ट के अधिकारिक कार्यालय में हुई। राम मंदिर आंदोलन के खास किरदार रहे महंत नृत्य गोपालदास को ट्रस्ट का अध्यक्ष घोषित किया गया।

अहम बिंदू

ट्रस्ट की पहली बैठक में नौ प्रस्ताव पारित किए गए। महंत नृत्य गोपालदास ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाए गए और विहिप के नेता चंपत राय को महासचिव बनाया गया।

गोविंददेवगिरी महाराज को कोषाध्यक्ष का पद दिया गया है। पीएम मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को भवन निर्माण समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया।

दिल्ली की फर्म वी. शंकर अय्यर एंड कंपनी, रंजीत नगर, पटेल नगर, नई दिल्ली को ट्रस्ट के चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए नियुक्त किया गया है। ये कंपनी ट्रस्ट के लेखा जोखा से संबंधित सभी काम करेगी।

अयोध्या के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में ट्रस्ट का बैंक खाता खोला जाएगा। इसका संचालन स्वामी गोविंददेवगिरी, चंपतराय, डॉ अनिल कुमार मिश्र में से किन्ही दो के संयुक्त हस्ताक्षरों से हो सकेगा।

इनके अलावा पहली बैठक में के. पारासरन, स्वामी नृत्यगोपालदास महाराज, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज, युगपुरुष स्वामी परमानंद महाराज, स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ महाराज, स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज, महंत दिनेंद्र दास महाराज, विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, डॉ. अनिल मिश्रा और कामेश्वर चौपाल मौजूद रहे।

बैठक में भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर अतिरिक्त सचिव गृह विभाग ज्ञानेश कुमार, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर आईएएस अवनीश अवस्थी और अयोध्या के जिलाधिकारी आईएएस अनुज कुमार झा इस दौरान मौजूद रहे।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (ट्रस्ट) की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रस्ट की पहली बैठक शुरू होने पर सबसे पहले 1528 ई. से लेकर वर्तमान समय तक कि मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे साधु-संतों और श्रद्धालुओं को श्रद्धांजलि समर्पित की गई।

इसके बाद केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और देश की न्यायिक व्यवस्था के प्रति आभार जताया गया। इसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों के नाम नामित किए गए

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर दिन शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया था। शीर्ष अदालत ने केंद्र और उत्तर प्रदेश  सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन ही रहेगी। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन दी जाए। इसके अलावा कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े और शिया वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज कर दिया था। हालांकि निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में जगह देने की अनुमति को स्वीकार कर लिया गया था।

इन पांच जजों ने दिया था ऐतिहासिक फैसला 
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए बोबडे, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने ये ऐतिहासिक फैसला दिया था।

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प्रधानमंत्री ने फैसले पर क्या कहा था
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट लिखा था कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।

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