नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ 69 दिनों से शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन जारी है। हजारों की संख्या में लोग वहां पर केंद्र सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं और पीएम मोदी व गृह मंत्री अमित शाह से सीएए और एनआरसी को वापस लेने की बात कह रहे हैं। बहुत से वामपंथी भी सीएए को लेकर विरोधियों की वकालत कर रहे हैं। असल में प्रदर्शनकारियों को सीएए, एनआरसी, एनपीआर से नहीं बल्कि नौकरियों, रोजगार को लेकर चिंता है। प्रदर्शनकारी भी जान चुके हैं कि वो राजनीति का शिकार हुए हैं और वो सीएए को लेकर गलत प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन वो ये भी जानते हैं कि जिस विरोध की आग को फैलने में 69 दिन लगे उसे बुझने में भी समय लगेगा।

तमाम न्यूज चैनलों पर प्रदर्शनकारी खुल कर बोल रहे हैं कि जिन्हें सरकार नागरिकता देगी उन्हें रोजगार कहां से देगी। ये मुद्दा भी विपक्ष का पैदा किया हुआ है और प्रदर्शन करने वाले लोग इसका शिकार हो गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि नागरिकता संशोधन कानून से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी। एनआरसी आएगा ये भले ही अमित शाह ने संसद में कहा हो, लेकिन कब आएगा ये तो नहीं बताया फिर विरोध का कारण क्या है। ये समझने की जरूरत है।

शुरुआत में विरोध हो रहा था सीएए मुस्लिम विरोधी है के नाम पर और इसे वापस लेने की मांग की जा रही थी। बाद में विरोध ने एनआरसी और एनपीआर को भी एड कर लिया। अगर आप गौर करें और कुछ पुरानी वीडियो देखें तो आपको समझ में आएगा कि धीरे-धीरे विरोध के सुर कैसे बदलने लगे। पहले सीएए, फिर एनआरसी, एनपीआर और अब ये राग अलापा जा रहा है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले प्रताड़ित हिंदुओं को अगर भारत में शरण दी जाएगी तो नौकरी कहां से देंगे। ये पूरी कार्यक्रम किसी एजेंडे के तहत चलाया जा रहा है।

जूझ रहे सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकार !

शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकार तीन दिन से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन विरोध करने वालों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त वार्ताकार सीनियर वकील संजय हेगड़े और वकील साधना रामचंद्रन आज तीसरे दिन फिर शाम 6:30 बजे प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए शाहीन बाग पहुंचे, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

एक अहम जानकारी आपको दे दें कि 69 दिन बाद नोएडा-फरीदाबाद वाला रोड पुलिस ने खोल दिया है। हालांकि पूरी तो नहीं लेकिन इससे मुसाफिरों को थोड़ी राहत मिली है। खैर, असल मुद्दे पर आते हैं। शुक्रवार को वरिष्ठ एडवोकेट साधना रामचंद्रन ने विरोध करने वालों से पूछा कि आपने तो एक रोड को बंद किया है तो दूसरा किसने किया है, इस पर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दूसरा रोड पुलिस ने बंद किया है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर एंबुलेंस आती है तो उसे निकलने के लिए रास्ता दिया जाता है। कुछ दिन पहले एक हिंदू की मौत हो गई तोउस की अर्थी निकालने के लिए सभी ने मिलकर बैरिकेडिंग हटाए और रास्ता दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा दिल्ली पुलिस हमें लिखित में दे कि सुरक्षा दी जाएगा तो रास्ता खोलने दिया जाएगा। क्योंकि मौखिक तौर पर हमें दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है।

एक बात को लेकर प्रदर्शनकारियों और वार्ताकारों में मतभेद

19 फरवरी को पहली बार सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए शाहीन बाग आए थे। पहले दिन से लेकर अभी तक वो इस बात पर अड़े हुए हैं कि कोई भी बातचीत मीडिया के सामने नहीं होगी, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जो भी बात होगी वो मीडिया के सामने होगी। हालांकि वार्ताकार भी भी प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने में लगे हुए हैं।