मंडी। हिमाचल में छोटी काशी के नाम से मशहूर मंडी में शिवरात्रि महोत्सव का लोग साल भर इंतजार करते हैं। शिवरात्रि महोत्सव 7 दिन तक चलता है। मंडी का शिवरात्रि महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान रखता है।

क्यों खास है मंडी का शिवरात्रि महोत्सव

पूर्वजों और मंडी का इतिहास के अनुसार शिवरात्री की परंपरा मंडी की रियासत के राज परिवार से पड़ी है। महोत्सव में सबसे पहले राज माधव राय की पालकी निकलती है उसके बाद शिवरात्रि महोत्सव की शोभा यात्रा निकलती है। राज माधव राय को भगवान विष्णु का रूप मानते हैं।

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कहा जाता है कि 17वीं सदी में मंडी रियासत के राजा सूरज सेन के 18 पुत्रों की मौत हो गई। उन्होंने अपना राज पाठ भगवान विष्णु के रूप यानि राज माधव राय को सौंप दिया और खुद सेवा करने लगे। इसलिए मंडी शिवरात्रि महोत्सव शुरू करने से पहले राज माधव राय की पूजा अर्चना की जाती है।

पूर्वजों द्वारा ऐसा कहा जाता रहा है कि एक मान्यता के अनुसार इस दिन शैव, वैष्णव और लोक देवता का संगम होता है। शैव मतलब भगवान शिव, वैष्णव यानि भगवान श्रीकृष्ण और लोक देव मतलब भगवान कमरूनाग।

मंडी के उपायुक्त इस महोत्सव के चेयरमैन होते हैं। महोत्सव के लिए प्रशासन की ओर से करीब 215 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा जाता है।