चडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में इंडियन नेशनल लोकदल के विधायक अभय सिंह चौटाला ने अपना पक्ष रखा। अभय चौटाला ने कहा कि नई सरकार लोगों से जो वायदे करके आई है। सरकार बताए कि वह अपने वादों को किस तरीके से अगले 5 साल में पूरा करेगी ?

अभय सिंह ने कहा कि राज्यपाल ने भी अभिभाषण के कुछ ही पन्ने पढ़े क्योंकि पढ़ने के लिए अभिभाषण में कुछ भी नहीं था। इस पर भाजपा विधायक कमल गुप्ता ने अभय के वक्तव्य को गलत बताया।

अभय ने कहा कि पिछले सीजन में उन्होंने सरसों की खरीद का मसला उठाया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने सरसों खरीद पर 25 क्विंटल खरीद लिमिट निर्धारित कर दी। जबकि 1 एकड़ में ही 14 क्विंटल तक सरसों पैदा हो जाती है। ऐसे में यदि किसान कई एकड़ में सरसों की पैदावार करते हैं तो उन्हें मजबूरन अपनी उपज सस्ते भाव में बेचनी पड़ती है। सरकार इस पर कोई जवाब नहीं देती। मजबूरन किसान को अपनी फसल औने पौने दामों में बेचना पड़ता है। इस कारण सरकार को फसल खरीद पर लगाई गई कैप को हटाना चाहिए।

सूरजमुखी की खरीद पर अभय सिंह चौटाला ने कहा कि पहले सरकार ने इसकी खरीद नहीं की। लेकिन जब किसानों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया तो सरकार ने औपचारिकता के नाम पर कुछ ही सूरजमुखी की फसल खरीदी। पिछले कार्यकाल के दौरान सरकार ने धान खरीद को लेकर एक कमेटी गठित की थी। सदन में मुख्यमंत्री ने खुद इसकी घोषणा की, लेकिन उसके लिए ना तो कोई नोटिफिकेशन जारी किया, ना ही कोई अधिकारियों की ड्यूटी लगाई। इसके बावजूद उन्होंने मंडियों का दौरा कर अपनी एक रिपोर्ट सरकार को पेश की। धान खरीद के नाम पर किसानों से ढाई सौ से 300 का घोटाला किया गया, लेकिन किसानों को पैसा नहीं मिला। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि धान घोटाले में चर्चाएं गर्म है। सरकार ने हर राइस मिलर से लाख रुपए की वसूली की है।

शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने कहा कि बीजेपी सरकार में उनकी सरकार की तुलना में अधिक सरसों की खरीद हुई है। यदि सदन सहमत है तो कांग्रेसी, इनेलो और बीजेपी सरकारों के कार्यकाल के आंकड़े निकलवाए जा सकते हैं। नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हमारे समय में कभी भी उपज खरीद को लेकर कोई भी कैप नहीं लगाई गई थी।