शिमला। सफर की हद है यहां तक की कुछ निशान रहें, चले चलो कि जहां तक ये आसमान रहे, ये क्या उठा एक कदम कि आ गई मंजिल, मजा तो तब है जब पैरों में कुछ थकान रहे। भले ही मुख्यमंत्री जयराम ने ये पंक्तियां अपने बजट भाषण के समापन पर कहीं हों, लेकिन असल जीवन में भी उन पर ये पंक्तियां सटीक बैठती हैं।

अमूमन देखा जाता है कि कोई वीआईपी बीमार हो जाए या कुछ समस्या में फंस जाए तो कार्यक्रम, भाषण या मीटिंग कैंसिल कर दी जाती है, लेकिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ स्थिति कुछ और है। दो दिन से सीएम जयराम की तबीयत खराब चल रही है। बजट भाषण के दिन यानि 6 मार्च को उन्हें खड़े होने में भी दिक्कत हो रही थी, लेकिन सीएम ने ढाई घंटे से ज्यादा देर तक खड़े होकर बजट भाषण पढ़ा।