कोरोना वायरस को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आ रही है,और वो ये है कि कोरोना वायरस का कहर आने वाले दिनों में और ज्यादा गहरा होता चला जाएगा…दरअसल इसके वैज्ञानिक आंकलन है ही साथ ही साथ गणितज्ञों के अनुसार भी ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ेग। जीहां हम आपको बता दे कि जहां चीन में मार्च महीने में सबसे कम मौते हुईं है। तो वहीं भारत में सबसे ज्यादा संक्रमित के केस सामने आए है।

पहले हम आपको बताते है कि जहां शुरुआती दौर में जहां 30 दिनों में सिर्फ 5 कोरोना के केस सामने आए थे। वहीं आज की तारीख में यानिकी पिछले 15 दिनों में 150 से ज्यादा मामले सामने आ गए है।और इसको लेकर एक फॉर्मूले के हिसाब से आंकलन करे तो फिर ये जान पड़ता है कि आने वाले और 15 दिनों में यानी अप्रैल महीने की शुरुआत में ही 250 मामले सामने आ सकते है…

दरअसल भारत में निमोनिया के लिए जिम्मेदार नया वायरस पैथजोन कोरोना अब तक 150 से ज्यादा लोगों को चपेट में ले चुका है. इंडिया टुडे की डाटा टीम डीआईयू ने बाकी देशों में बीमारी के बढ़ने की रफ्तार और टेस्टिंग के बाद नए मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद पाया कि भारत सहित दक्षिण एशिया के कई देशों में यह बीमारी और बढ़ सकती है. सरकार ने इस बीमारी की टेस्टिंग के लिए निजी प्रयोगशालाओं को मुफ्त में जांच करने के लिए कहा है. अब 500 की जगह रोजाना 8000 लोगों की टेस्टिंग करने की तैयारी चल रही है.

कोरोना वायरस ने भारत में 33 दिनों में पांच लोगों को संक्रमित किया लेकिन उसके बाद अगले 15 दिनों में 148 लोगों को चपेट में ले लिया है. ठीक इसी तरह पाकिस्तान में छह दिन में कोरोना वायरस के पांच मामले आए लेकिन अगले 11 दिनों के भीतर 236 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं. अब जरा चीन के अलावा उन देशों में इस बीमारी की रफ्तार पर गौर करिए जहां इसका कहर हजारों लोगों को चपटे में ले चुका है.

दक्षिण कोरिया में जहां कोरोना वायरस ने 29 दिन के भीतर सौ लोगों को संक्रमित कर दिया तो वहीं अगले महज 16 दिन में इस बीमारी ने सात हजार लोगों को चपेट में ले लिया. कुछ इसी तरह से इस बीमारी ने इटली और बाकी देशों में भी पांव पसारे हैं.

कोरोना जिसका वैज्ञानिक नाम कोविड-19 दिया गया है उसकी शुरुआत पिछले साल दिसंबर में चीन के वुहान शहर से हुई. कोविड-19, कोरोना वायरस परिवार का नया सदस्य है जो जानवरों से उछलकर आदमी में घुस गया. जांस हॉपकिंस यूनिवर्सिटी पूरी दुनिया में इस बीमारी के आंकड़े इकट्ठा कर रही है. उस आंकड़े से साफ है कि औसतन दस से पंद्रह दिन की सुस्त चाल के बाद यह बीमारी आग की तरह फैलती है।