पांवटा साहिब। बड़ी हैरत की बात है कि आखिर लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच सात लोग घोड़ों के साथ सोलन से पांवटा कैसे पहुंच गए। क्या उन्हें रास्ते में किसी पुलिसवाले ने नहीं रोका। सोलन में कई जगह नाकाबंदी है। सोलन से पांवटा तक रास्ते में कई जगहों पर पुलिस ने नाका लगा रखा है। फिर भी ये लोग पांवटा पहुंच गए।

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कोरोना वायरस के कारण प्रदेश सरकार ने कर्फ्यू लगा रखा है। पूरे देश मे लॉकडाउन है, लेकिन इसी बीच सोलन से बिना अनुमति सात प्रवासी मजदूर अगने 21 घोड़ों के साथ पांवटा साहिब पहुंच गए। जब ये उत्तराखंड के बहराल बॉर्डर पर पहुंचे तो उन्हें पुलिस ने इन्हें अनुमति पत्र दिखाने को कहा, लेकिन किसी के पास भी अनुमति पत्र नहीं होने के कारण सभी को वापस भेज दिया।

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मजदूरों में मोहम्मद साजिद, नौशाद, बासिद, अफजल, राकिब, शहबाज और शमशाद का कहना है कि वे ढाई महीने से सोलन में काम कर रहे थे। उनके पास 21 घोड़े हैं और सोलन में रहकर उनके चारे की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इसलिए मजबूरी में उन्हें घर जाना पड़ा। इसलिए मजबूरी में वे रविवार को सोलन से बिजनौर के नजीबाबाद के लिए निकल गए। आपको बता दें कि सोलन से यूपी का नजीबाबाद लगभग 300 किलोमीटर है।

न्यूज जंक्शन से फोन पर बातचीत में पांवटा साहिब एसडीएम लायक राम वर्मा ने बताया कि मंगलवार को सात लोग अनुमति पत्र के लिए आए थे। पहले उनकी मेडिकल जांच की गई और फिर जिलाधिकारी के अप्रूवल पर उन्हें अनुमति पत्र दे दिया गया। साथ ही देहरादून और बिजनौर प्रशासन को सूचित कर दिया गया है।