जयपुर। करीब एक महीने से राजस्थान में चल रहा सियासी ड्रामा आखिरकार 14 अगस्त को खत्म हो गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विश्वास मत हासिल कर लिया और इसके साथ ही 21 अगस्त तक सदन को स्थगित कर दिया गया।
 पायलट की गहलोत से सुलह होने के बाद राजस्थान में सरकार गिरते-गिरते बच गई। ये हम नहीं कह रहे बल्कि वहां की आम जनता कह रही है। 14 अगस्त से शुरू हुए विधानसभा सत्र में ध्वनि मत से विश्वास प्रस्ताव पारित किया गया।
विश्वास मत हासिल करने के बाद सीएम गहलोत ने ट्वीट कर कहा, ‘विधानसभा में विश्वास मत जीतना उन ताकतों के लिए एक संदेश है जो देश में निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी हर रणनीति राजस्थान में विफल रही। यह लोगों की हमारे प्रति अटूट आस्था और हमारे कांग्रेस विधायकों की एकता है जिसने यह जीत दिलाई है।’

इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज बीजेपी के लोग बगुला भगत बन रहे हैं। सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है। मैं 69 साल का हो गया, 50 साल से राजनीति में हूं. मैं आज लोकतंत्र को लेकर चिंतित हूं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सम्माननीय नेता प्रतिपक्ष को कहना चाहूंगा कि आप चाहे कितनी भी कोशिश कर लो, मैं आपको कहता हूं कि मैं राजस्थान की सरकार को गिरने नहीं दूंगा।

वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने और वसुंधरा राजे के बीच के रिश्ते पर सफाई दी. गहलोत ने कहा कि ऐसा कहा रहा है कि हम आपस में मिले हुए हैं, मगर इसमें कोई सच्चाई नहीं है. मेरी उनसे कोई बातचीत नहीं होती है. मेरी तो इच्छा होती है कि एक बार वसुंधरा जी आएं और एक बार मैं आऊं. लेकिन इस बार कुछ लोगों ने सोचा कि मैं आ जाऊं और वसुंधरा को किनारे कर दूं.

गायब हो गए बीजेपी के 4 एमएलए

गहलोत के बहुमत परीक्षण ने राजस्थान भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वोटिंग से ठीक पहले भाजपा के चार विधायक अपने मोबाइल स्विच ऑफ करके विधानसभा से गायब हो गए।

ये विधायक थे गायब

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र गिर्डी के विधायक कैलाश मीणा, दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक गौतम मीणा, आसपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक गोपीचंद मीणा और घाटोल से विधायक हरेंद्र निनामा वोटिंग से पहले गायब हो गए। वोटिंग कराने के लिए भाजपा के नेता इनकी तलाश में जुटे रहे, लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगा। इन विधायकों के मोबाइल फोन भी स्वीच ऑफ थे। अंत में मजबूर होकर भाजपा ने वोटिंग कराने की मांग नहीं की। विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद चारों विधायक लौटे।