नई दिल्ली। 74वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से सातवीं बार तिरंगा फहराया। पीएम ने कहा कि LoC से लेकर LAC तक, देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख दिखाई है, देश ने, देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की संप्रभुता का सम्मान हमारे लिए सर्वोच्च है. इस संकल्प के लिए हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं, देश क्या कर सकता है, ये लद्दाख में दुनिया ने देखा है।

74वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से हुंकार भरते हुए कहा कि LoC से लेकर LAC तक जिसने भी हमें आंख दिखाई है। हमने उन्हें माकूल जवाब दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे जवान क्या कर सकते हैं इसे पूरी दुनिया ने लद्दाख में देखा।

पीएम ने लाल किले से कहा कि इतनी आपदा के बाद भी सीमा पर देश के सामर्थ्य को चुनौती देने की गंदी कोशिश हुई है। लेकिन LoC से लेकर LAC तक देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने भी आंख उठाई, देश की सेना ने हमारे वीर जवानों ने उसका उसी की भाषा में जवाब दिया है। भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरा देश एक जोश से भरा हुआ है। संकल्पों से प्रेरित है और सामर्थ्य पर अटूट श्रद्धा से आगे बढ़ रहा है। इस संकल्प के लिए हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं, देश क्या कर सकता है ये लद्दाख में दुनिया ने देख लिया है। पीएम ने कहा कि मैं आज मातृभूमि पर न्योछावर उन सभी वीर जवानों को आदरपूर्वक नमन करता हूं। आतंकवाद हो या विस्तारवाद भारत आज इसका डटकर मुकाबला कर रहा है।

उन्होंने अपने 86 मिनट के भाषण में आत्मनिर्भर, आत्मनिर्भर भारत, कोरोना संकट, आतंकवाद, रिफॉर्म, मध्यमवर्ग और कश्मीर का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत पर ज्यादा जोर दिया। इस शब्द का 30 बार इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कोरोना इतनी बड़ी विपत्ति नहीं कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को रोक पाए।

उन्होंने कहा कि अब कोरोना के बीच 130 करोड़ लोगों ने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया है। हम यह करके रहेंगे। दुनिया के अनेक बिजनेस भारत को दुनिया के सप्लाई चेन को देख रहे हैं। हमें मेक इन इंडिया के साथ-साथ मेक फॉर वर्ल्ड को लेकर आगे बढ़ना है।’

मोदी ने कहा, ‘आत्मनिर्भर भारत आज हर भारतवासी के मन-मस्तिष्क में छाया हुआ है। इस सपने को संकल्प में बदलते देख रहे हैं। ये आज 130 करोड़ देशवासियों के लिए मंत्र बन गया है। जब मैं आत्मनिर्भर की बात करता हूं, तो कई लोगों ने सुना होगा कि अब 21 साल के हो गए हो, अब पैरों पर खड़े हो जाओ। 20-21 साल में परिवार अपने बच्चों से पैरों पर खड़े होने की अपेक्षा करता है। आज आजादी के इतने साल बाद भारत के लिए भी आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। जो परिवार के लिए जरूरी है, वो देश के लिए भी जरूरी है। भारत इस सपने को चरितार्थ करके रहेगा। मुझे इस देश के सामर्थ्य, प्रतिभा पर गर्व है।

‘कोरोना के संकट में हमने देखा कि दुनिया में कठिनाई हो रही है। दुनिया चीजें नहीं दे पा रहीं। इस देश में एन-95 मास्क नहीं बनता था, पीपीई किट नहीं बनती थीं, वेंटिलेटर नहीं बनते थे, अब बनने लगे। आत्मनिर्भर भारत दुनिया की कैसे मदद कर सकता है, यह आज हम देख सकते हैं। …बहुत हो चुका। आजाद भारत की मानसिकता क्या होनी चाहिए। वोकल फॉर लोकल। स्थानीय उत्पादों का गौरव गान करना चाहिए। ऐसा नहीं करेंगे तो उसकी हिम्मत नहीं बढ़ेगी। हम मिलकर संकल्प लें कि 75 साल की तरफ जब हम बढ़ रहे हैं तो वोकल फॉर लोकल का मंत्र अपनाएं।’

मोदी ने कहा, ‘जब हम एक असाधारण लक्ष्य लेकर असाधारण यात्रा पर निकलते हैं तो रास्ते में चुनौतियों की भरमार होती है और चुनौतियां भी असामान्य होती हैं। सीमा पर देश के सामर्थ्य को चुनौती देने के प्रयास हुए। लेकिन एलओसी लेकर एलएसी तक देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख उठाई, देश की सेना ने और हमारे वीर जवानों ने उसी भाषा में जवाब दिया है। भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरा देश एक जोश से भरा हुआ है। संकल्प से प्रेरित है और सामर्थ्य पर आगे बढ़ रहा है। हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं, देश क्या कर सकता है, ये लद्दाख में दुनिया ने देख लिया है। मैं आज मातृभूमि पर न्योछावर सभी वीर जवानों को लाल किले की प्राचीर से आदरपूर्वक नमन करता हूं।’

उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद हो या विस्तारवाद, आज भारत डटकर मुकाबला कर रहा है। दुनिया का भारत पर विश्वास मजबूत हुआ है। पिछले दिनों भारत संयुक्त राष्ट्र में 192 में से 184 वोट हासिल कर अस्थायी सदस्य चुना गया। विश्व में हमने कैसे यह पहुंच बनाई है, यह इसका उदाहरण है। जब भारत मजबूत हो, भारत सुरक्षित हो, तब यह संभव होता है। भारत का लगातार प्रयास है कि अपने पड़ोसी देशों के साथ अपने सदियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को और गहराई दें। दक्षिण एशिया में दुनिया की एक चौथाई जनसंख्या रहती है।’

उन्होंने कहा कि आजादी के इस पावन पर्व की सभी देशवासियों को शुभकामनाएं। आज जो हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे मां भारती के लाखों बेटे-बेटियों का त्याग-बलिदान और समर्पण है। आज आजादी के वीरों, रणबांकुरों का नमन करने का पर्व है। हमारी सेना-अर्धसैनिक बलों के जवान, पुलिस के जवान, सुरक्षाबलों से जुड़े हर कोई, मां भारती की रक्षा में जुटे रहते हैं। आज उनकी सेवा को भी नमन करने का पर्व है। अरविंद घोष की आज जयंती है। क्रांतिकारी से आध्यात्मिक ऋषि बने। आज उन्हें भी याद करने का दिन है। कोरोना के चलते आज बच्चे नजर नहीं आ रहे। कोरोना के संकट में मैं कोरोना वॉरियर्स को नमन करता हूं।

मोदी के भाषण की अहम बातें

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मेरे प्यारे देशवासियों! आजादी के वीरों को याद कर नई ऊर्जा का यह संकल्प होता है। एक प्रकार से हमारे लिए यह नई प्रेरणा लेकर आता है। नई उमंग, नया उत्साह लेकर आता है। हमारे लिए नया संकल्प लेना जरूरी भी है। अगले साल हम 75वें वर्ष में प्रवेश करेंगे। यह अपने आप में बहुत बड़ा अवसर है। इसलिए आज आने वाले दो साल के लिए बहुत बड़े संकल्प लेकर हमें चलना है। आजादी के 75 साल में जब हम प्रवेश करेंगे और 75 साल जब पूरे होंगे, तब हम हमारे संकल्पों की पूर्ति के महापर्व के रूप में मनाएंगे।’
  • ‘हमारे पूर्वजों ने अखंड एकनिष्ठ तपस्या करके हमें जिस प्रकार से आजादी दिलाई, उन्होंने न्योछावर कर दिया खुद को। हम ये न भूलें कि गुलामी के इतने कालखंड में कोई भी पल या क्षेत्र ऐसा नहीं था, जब आजादी की ललक न उठी हो। आजादी की इच्छा को लेकर किसी न किसी ने प्रयास न किया हो या त्याग न किया हो। जवानी जेलों में खपा दी। फांसी के फंदों को चूमकर जीवन आहूत कर दिया। एकतरफ सशस्त्र क्रांति का दौर, एकतरफ जनआंदोलन का दौर। बापू ने आजादी के आंदोलन को एक ऊर्जा दी। इस आजादी की जंग में भारत की आत्मा को कुचलने के भी निरंतर प्रयास हुए।’
  • ‘भारत को अपनी संस्कृति, परंपरा, रीत-रिवाज से उखाड़ फेंकने के लिए क्या कुछ नहीं हुआ। वह सैकड़ों कालों का कालखंड था। साम-दाम-दंड-भेद, सब कुछ अपने चरम पर था। कुछ लोग ये मानकर चलते थे कि यहां पर राज करने के लिए आए हैं। लेकिन आजादी की ललक ने उनके सारे मंसूबों को जमींदोज कर दिया। उनकी सोच थी कि इतना बड़ा विशाल देश, अनेक राजे-रजवाड़े, भांति-भांति की बोलियां, खानपान, अनेक भाषाएं, इतनी विविधताओं के कारण बिखरा देश कभी एक होकर आजादी की लड़ाई नहीं लड़ सकता। लेकिन वे यहां की प्राण शक्ति नहीं पहचान पाए।’
  • ‘ऐसे कालखंड के बीच भी देश ने अपनी आजादी की ललक को नहीं छोड़ा। कष्ट झेलता रहा। भारत की इसी लड़ाई ने दुनिया में आजादी के लिए एक माहौल बना दिया। भारत की एक शक्ति ने दुनिया में बदलाव लाया। विस्तारवाद के लिए चुनौती बन गया भारत। इतिहास इस बात को नहीं नकार सकता। आजादी की लड़ाई में पूरे विश्व में भारत ने अपनी एकजुटता की ताकत, अपनी सामूहिकता की ताकत, अपने उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपना ऊर्जा, संकल्प और प्रेरणा लेकर देश आगे बढ़ता चला गया।’
  • ‘हमारा देश कैसे-कैसे कमाल करता है और आगे बढ़ता है, इस बात को हम समझ सकते हैं। कौन सोच सकता था कि कभी गरीबों के जनधन खातों में लाखों-करोड़ों रुपए सीधे ट्रांसफर हो जाएंगे। कौन सोच सकता था कि किसानों की भलाई के लिए कानून में बदलाव हो सकते हैं। कौन सोचता था कि हमारा स्पेस सेक्टर हमारे देश के युवाओं के लिए खोल दिया जाएगा। आज हम देख रहे हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति हो, वन नेशन वन कार्ड की बात हो, वन नेशन वन ग्रिड की बात हो, वन नेशन वन टैक्स की बात हो, बैंकरप्सी कोड की बात हो या बैंकों को मर्ज करने का प्रयास हो, भारत के परिवर्तन के इस कालखंड में रिफॉर्म के पैमानों को दुनिया देख रही है।’
  • ‘बीते वर्ष भारत में एफडीआई ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। बीते वर्ष भारत में एफडीआई 18% बढ़ा। इसलिए कोरोनाकाल में भी दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत की ओर रुख ले रही हैं। ये विश्वास ऐसे ही पैदा नहीं हुआ। ऐसे ही दुनिया मोहित नहीं हुई। इसके लिए भारत ने अपनी नीतियों और अपने लोकतंत्र की मजबूती पर काम किए हैं, उसने यह विश्वास जगाया है।’
  • ‘देश आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता गया। देश की अर्थव्यवस्था को कोरोना के प्रभाव से जल्द से जल्द बाहर निकालना हमारी प्राथमिकता है। इसमें अहम भूमिका रहेगी नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की। इस पर 110 लाख करोड़ से भी ज्यादा खर्च किए जाएंगे। अलग-अलग सेक्टर में 7 हजार प्रोजेक्ट्स की पहचान कर ली गई है। इससे देश के ओवरऑल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को नई दिशा और गति मिलेगी। ऐसे संकट की घड़ी में इन्फ्रास्ट्रक्चर को जितना बल दिया जाए, उतना फायदा है।’
  • ‘आत्मनिर्भर की पहली प्राथमिकता आत्मनिर्भर कृषि और आत्मनिर्भर किसान है। एक के बाद एक रिफॉर्म किसानों के लिए हुए हैं। किसानों को तमाम बंधनों से मुक्त करने का काम हमने किया। आप कपड़ा, साबुन बनाते हैं तो उसे देश में कहीं बेच सकते हैं। देश का किसान न अपनी मर्जी से बेच सकता था, न जहां बेचना चाहता था, वहां बेच सकता था। उसके सारे बंधनों को हमने खत्म कर दिया है। अब देश का किसान दुनिया के किसी भी कोेने में अपनी शर्तों पर उपज बेच सकता है।’
  • ‘किसानी में इनपुट कॉस्ट कैसे कम हो, सोलर पम्प उन्हें कैसे मिलें। मछलीपालन जैसी चीजें कैसे उसके साथ जुड़ जाएं, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। पिछले दिनों एक लाख करोड़ रुपए एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर भारत सरकार ने आवंटित किए हैं। इससे विश्व बाजार में भारत के किसान में उसकी पहुंच बढ़ेगी।’
  • ‘ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष तौर पर आर्थिक क्लस्टर बनाए जाएंगे। किसानों के लिए किसान उत्पादक संघ बनाने की कोशिश की है। मैंने पिछली बार यहां जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। हमने सपना लिया है कि पीने का शुद्ध जल सभी को मिलना चाहिए। अर्थव्यवस्था में भी इसका योगदान होता है। मुझे संतोष है कि हर दिन हम 1 लाख से ज्यादा घरों में पाइप से जल पहुंचा रहे हैं। पिछले एक साल में दो करोड़ परिवारों तक जल पहुंचाने में कामयाब रहे हैं। आदिवासियों के घर तक इसे पहुंचाने का काम चला है। जल जीवन मिशन ने देश में तंदरूस्त स्पर्धा का माहौल बनाया है।’
  • ‘भारत का मध्यमवर्ग दुनिया में अपना डंका बजा रहा है। मध्यमवर्ग को जितने अवसर मिलते हैं, वह उतनी बड़ी ताकत के साथ उभरकर सामने आता है। उसके लिए खुला मैदान चाहिए। हमारी सरकार इसके लिए काम कर रही है। ईज ऑफ लिविंग का सबसे बड़ा फायदा अगर किसी को होगा तो मध्यमवर्ग परिवारों को होगा। हवाई जहाजों की टिकटें सस्ती होना, इंटरनेट मिलना, इन चीजों से मध्यमवर्ग की ताकत बढ़ेगी। उसका सपना अपना घर बनाने का होता है। होम लोन अब सस्ते हैं। उसे छह लाख रुपए तक छूट मिल जाती है। गरीब परिवारों ने पैसे लगाए, लेकिन योजनाएं पूरी नहीं होने से उन्हें घर नहीं मिल रहा था। हमने 25 हजार करोड़ रुपए का फंड इसके लिए बनाया है।’
  • ‘आत्मनिर्भर भारत और आधुनिक भारत के निर्माण में देश की शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है। इसी सोच के साथ देश को तीन दशक के बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देने में हम सफल रहे हैं। ये शिक्षा नीति हमारे बच्चों को जड़ से जोड़ेगी, लेकिन साथ-साथ एक ग्लोबल सिटिजन बनाने का भी सामर्थ्य देगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन पर बल दिया गया है। इससे देश को आगे ले जाने में ताकत मिलेगी।’
  • ‘आपने सोचा होगा कि क्या इतनी तेजी से गांवों तक ऑनलाइन क्लासेस का माहौल बन जाएगा? कोरोना में यह कल्चर बन गया। ऑनलाइन डिजिटल ट्रांजैक्शन भी बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने में भारत जैसे देश में 3 लाख करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ है। 2014 से पहले हमारे देश में 5 दर्जन पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर था। 5 साल में डेढ़ लाख पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर पहुंच चुका है। गांवों की भी डिजिटल इंडिया में भागीदारी जरूरी हो गई है। इसे ध्यान में रखते हुए हमने हर पंचायत तक पहुंचने का कार्यक्रम बनाया था। हमने तय किया है कि 6 लाख से ज्यादा गांवों में ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाएंगे। लाखों किलोमीटर तक ऑप्टिल फाइबर बिछाई जाएगी। एक हजार दिन में देश के 6 लाख से ज्यादा गांवों में ऑप्टिकल फाइबर का काम पूरा कर दिया जाएगा।’
  • ‘साइबर स्पेस में हम आत्मनिर्भर होते जा रहे हैं। इससे देश के सामाजिक ताने-बाने और विकास पर भी खतरा पैदा हो गया है। भारत बहुत सचेत और सतर्क है। इसका सामना करने के लिए फैसले ले रहा है। नई योजनाएं भी विकसित हो रही हैं। आने वाले समय में सब इकाइयों को जोड़कर हमें एकसाथ चलना होगा। भारत में महिला शक्ति को जब-जब अवसर मिले तो उन्होंने देश को नई मजबूती दी है। आज देश प्रतिबद्ध है। आज भारत में महिलाएं कोयले की खदानें काम कर रही हैं तो देश की बेटियां फाइटर प्लेन उड़ाकर आसमान की बुलंदियों को चूम रही हैं। आज देश की सेनाओं में महिलाओं को कॉम्बैट रोल में शामिल किया जा रहा है। तीन तलाक के कारण पीड़ित मुस्लिम बहनों को हमने इससे आजादी दिलाई है।’
  • ’40 करोड़ जनधन खातों में से 22 करोड़ खाते महिलाओं के हैं। 25 करोड़ मुद्रा लोन में 70% लोन महिलाओं को दिया गया है। गरीब बहन-बेटियों के बेहतर स्वास्थ्य की चिंता यह सरकार लगातार कर रही है। हमने छह हजार जनऔषधि केंद्रों में हमने एक रुपए में 5 करोड़ से ज्यादा सैनेटरी पैड्स मुहैया कराए हैं। बेटियों की शादी की उम्र के बारे में भी जल्द उचित फैसले लिए जाएंगे।’ ‘आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी सीख हमें हेल्थ सेक्टर ने सिखा दी है। हमें इसमें आगे भी बढ़ना है। हमारे देश में पहले एक ही लैब थी कोराेना टेस्टिंग के लिए। आज 1400 लैब हैं। एक दिन में 300 टेस्ट हो रहे थे, आज 7 लाख से ज्यादा टेस्ट कर पा रहे हैं। देश में नए एम्स और नए मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। 5 साल में एमबीबीएस और एमडी में 45 हजार से ज्यादा सीटें बढ़ाई गई हैं। गांवों में डेढ़ लाख से ज्यादा वेलनेस सेंटर हैं।’
  • ‘हेल्थ सेक्टर में आज से बहुत बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। आज से नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की शुरुआत हो रही है। भारत के हेल्थ सेक्टर में यह नई क्रांति लाएगा। हर भारतीय को हेल्थ आईडी दी जाएगी। यह उसके खाते की तरह काम करेगी। आपकी बीमारी, किस डॉक्टर ने क्या दवा दी, रिपोर्ट क्या थी। यह सारी जानकारी इसमें शामिल की जाएगी। पैसा जमा करना हो, अस्पताल में पर्ची बनवाने की भागदौड़ हो, इससे मुक्ति मिलेगी। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हर नागरिक सही फैसले कर पाएगा।’
  • ‘ भारत में 3 कोरोना वैक्सीन की टेस्टिंग अलग-अलग चरणों में है, हर भारतीय तक कम समय में वैक्सीन पहुंचाने की पूरी तैयारी है’
    मोदी ने कहा, ‘कोरोना की वैक्सीन कब तैयार होगी, यह बड़ा सवाल है। देश के हमारे वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों की तरह जी-जान से जुटे हुए हैं। वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं। भारत में एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन वैक्सीन टेस्टिंग के अलग-अलग चरण में हैं। जब वैज्ञानिकों से हरि झंडी मिलेगी तो बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन होगा। इसकी तैयारियां पूरी हैं। हर भारतीय तक वैक्सीन कम से कम समय में कैसे पहुंचे, इसका खाका भी तैयार है।’
  • मोदी ने इस बार कश्मीर का अलग संदर्भ में जिक्र किया
    पीएम ने कहा, ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए कई चुनौतियां हैं। हमें विकास के नए युग काे आगे बढ़ा रहे हैं। विकास यात्रा में सरपंचों की विकास यात्रा सक्रिय भागीदारी है। जम्मू-कश्मीर में डिलिमिटेशन की प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरा होते ही वहां चुनाव होंगे। जम्मू-कश्मीर में विधायक चुनकर आएं और विकास के लिए आगे बढ़ें, इसके लिए देश प्रतिबद्ध है। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर हमने वहां की लंबे समय की मांग पूरी की है। अब सेंट्रल यूनिवर्सिटी वहां बन रही है। नए रिसर्च सेंटर बन रहे हैं। होटल मैनेजमेंट के कोर्स चल रहे हैं।’ ‘लद्दाख की कई विशेषताएं हैं। जैसे सिक्किम ने अपने ऑर्गेनिक टेस्ट की पहचान बनाई है। उसी तरह लद्दाख, लेह और कारगिल हमारे देश में कार्बन न्यूट्रल इकाई के रूप में अपनी पहचान बना सकता है।’