शिमला। हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि हिमाचल में 14 सुरंगों का निर्माण होगा। इसमें सर्वाधिक जिला शिमला में 6 सुरंगें शामिल  हैं। प्रदेश सरकार के इस फैसले से सैकड़ों किलोमीटर दूरी कम होगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह जानकारी कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से सदन पटल पर पूछे गए लिखित सवाल के जवाब में दी।

जिला शिमला में लिफ्ट से लक्कड़ बाजार, लिफ्ट से हिमलैंड, लिफ्ट से आईजीएमसी, संजौली-ढली, निगुलसरी त्रांडा, जिला बिलासपुर के कैंची मोड़-मेहला, जिला कुल्लू और मंडी के बीच भू-भू जोत, ऊना-हमीरपुर जिला के बंगाणा-धनेटा, जिला चंबा के होली उतराला, इसी जिले में तीसा-किलाड़, चामुंडा-होली सुरंग जिला कांगड़ा, गागल स्थित जंजैहली जिला मंडी और जलोड़ी जोत कुल्लू शामिल है।

राज्य सरकार ने कहा है कि पब्बर नदी के तटीकरण के लिए 190.82 करोड़ प्रशासनिक और व्यय स्वीकृति मिल चुकी है। 
कांग्रेस विधायक मोहन लाल ब्रागटा ने सदन में सवाल पूछा था कि पब्बर नदी के तटीकरण की वर्तमान स्थिति क्या है। इस पर सरकार ने सदन को अवगत कराया कि पब्बर नदी के तटीकरण की योजना को 190.82 करोड़ की प्रशासनिक अनुमोदन और व्यय स्वीकृति 26 जून, 2015 को प्रदान कर दी गई थी। केंद्रीय जल आयोग ने 7 अगस्त, 2020 को 13वीं बैठक में पब्बर नदी के तटीकरण के लिए निवेश क्लीयरेंस की मंजूरी प्रदान कर दी है। 

प्रदेश सरकार ने जुखाला सब्जी मंडी के लिए 71.25 लाख की राशि मंजूर की है। इस सब्जी मंडी में कोल्ड स्टोर बनाने की कोई योजना नहीं है। इस सब्जी मंडी का निर्माण कार्य कोरोना संक्रमण के कारण रोक दिया गया था। अब इसका काम फिर से शुरू हो गया है। कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर ने जुखाला सब्जी मंडी से जुड़ा सवाल सदन में उठाया। इस पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री मंत्री वीरेंद्र कंवर ने सदन को अवगत कराया।

निविदा प्रक्रिया पूरी करने के बाद नीलामी मंच, 7 दुकानें और शौचालय निर्माण कार्य ठेकेदार ने दिनांक 2 नवंबर, 2019 से शुरू किया था। लेकिन, कोरोना महामारी के कारण यह कार्य ठेकेदार ने 25 मार्च, 2020 से बंद कर दिया था। अब 5 मई 2020 से पुन:  शुरू किया गया है। अभी तक ग्राउंड फ्लोर पर स्लैब डाल दिया है। करीब 45 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो गया है। निर्माण कार्य पर कुल 14,64,949 रुपये की राशि व्यय हो चुकी है। 

प्रदेश में बीते तीन साल के दौरान विभिन्न मंजूरियां नहीं मिलने के चलते 711 बिजली परियोजनाएं लंबित हैं। भाजपा विधायक रमेश धवाला के सवाल का लिखित जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 3587 मेगावाट क्षमता की इन परियोजनाओं को स्वीकृति न मिलने के कई कारण हैं। विभिन्न विभागों से एनओसी लेनी होती है। डीपीआर बनानी होती है। वित्तीय कमी, स्थानीय लोगों की ओर से डाली जाने वाली रुकावटें, वन विभाग के नियमों में बदलाव आने, लागत राशि बढ़ जाने सहित कई अन्य कारणों के चलते स्वीकृतियां देने में देरी होती है। स्वीकृतियां और अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की जिम्मेवारी परियोजना निर्माण करने वाले की होती है। परियोजनाओं को शुरू करने में हो रही देरी के लिए किसी एक विभाग को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता है।

हिमाचल में नेशनल पैराग्लाइडिंग स्कूल खोलने का अभी कोई विचार नहीं है। प्रदेश में पैराग्लाइडिंग को बढ़ावा देने के लिए जिला कांगड़ा के बीड में पैराग्लाइडिंग सेंटर स्थापित किया जा रहा है। निजी कंपनी को इसका काम सौंपा गया है। स्थान का चयन भी कर लिया गया है। डीपीआर बनाने का काम शुरू हो गया है। स्वदेश दर्शन योजना के तहत इसके लिए आठ करोड़ के बजट का प्रावधान है। कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की।