पालमपुर। हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई गैंगरेप की घटना और फिर उसकी मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. पूरे देश में पीड़िता को इंसाफ के लिए आवाज उठ रही है. हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार ने कहा कि मध्य प्रदेश के स्पेशल डी.जी पुलिस पुरूशोतम शर्मा द्वारा अपनी पत्नि की वेरहमी से पीटाई का वीडियो देखकर और उसके साथ ही हाथरस में एक दलित बेटी से गैंग रेप- फिर उसकी पिटाई – रीढ़ की हड्डी तक तोड़ डाली और अस्पताल में उसकी मृत्यु। ऐसी घटनायें देश के माथे पर बहुत बड़ा कलंक हैं।

उन्होंने कहा कि 130 करोड़ के इस देश में मात्र कुछ ही ऐसी घटनायें प्रकशित हो पाती हैं। बहुत घटनायें तो दवाई व छिपाई जाती हैं. उन्होंने कहा कि 8 वर्ष पहले दिल्ली का निर्भया कांड फिर हिमाचल का गुडिया कांड और अब यह हाथरस कांड – यह सब सिद्ध करता है कि कुछ भी बदला नहीं है। इतना ही नहीं बेटियों पर अपराध बढ़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भारत के वैदिक काल में – यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः अर्थात जहां नारी की पूजा होती है देवता वहीं रहते हैं- हमारा आदर्श था, परन्तु पतित मध्यकाल में पुरुष प्रधान समाज ने – “ढोल गंवार शूद्र पशु नारी-ये सब ताड़न के अधिकारी” – अपना आदर्श बना लिया है. इससे बड़ा दुर्भाग्य व कलंक और क्या हो सकता है कि वही पशु मनोवृति आज भी जीवित है।

सभ्य और शालीन समझे जाने बाले सिनेमा जगत में कंगना रनौत जैसी प्रतिभाशाली कलाकारों को भी जिस शर्मनाक यौन शोषण से गुजरना पड़ता है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण व शर्मनाक है.

शान्ता कुमार ने कहा कि आज से लगभग 5 हजार साल पहले एक द्रौपदी की केवल साड़ी उतारी गई थी तो भारत के इतिहास का अत्यन्त भयानक युद्ध हुआ था। आज भारत में केवल साड़ी ही नहीं सब कुछ यहां तक की आत्मा तक भी कुचल दी जाती है परन्तु पूरा देश देखता रहता है.

उन्होंने कहा कि यौन शोषण नारी के शरीर नहीं आत्मा की हत्या है। यह हत्या से भी कई गुणा ज्यादा अपराध है. आज के सभ्य कहे जाने बाले युग में भारत में यौन शोषण ही नहीं – केवल रेप ही नहीं -गैंग रेप और उसके बाद हैवानियत से हत्यायें हो रही हैं. इससे बड़ा कलंक भारत के माथे पर और कोई नहीं हो सकता.

उन्होंने कहा कि नारियों को केवल वस्तु और हीन समझने की मघ्य कालीन युग की वही पुरुष प्रधान मनोवृति आज भी जीवित है. उन्होंने देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह से विशेष आग्रह किया है कि सुशांत राजपूत आत्महत्या या हत्या की जांच कर रही सी0बी0आई इस दृश्टि से भी विचार करे और भारत सरकार इस शर्मनाक मनोवृति को समाप्त करने के लिये एक कठोर कानून बनाये.