सोलन। भले ही आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं और खुद को मॉर्डन कहते हैं, लेकिन अभी भी समाज में कुछ लोगों की मानसिकता हजारों साल पुरानी और संकीर्ण है. इसका ताजा उदाहरण हिमाचल जिले के सोलन में देखने को मिला, जहां मां शूलिनी के के दरबार में एक महिला आईएएस अधिकारी को हवन यज्ञ करने से रोका गया.

दुर्गा अष्टमी के दिन हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में मां शूलिनी के दरबार में महिला आईएएस अफसर रितिका जिंदल को हवन यज्ञ करने से रोक दिया। इसके पीछे पंडितों ने तर्क दिया कि कोई भी महिला हवन में हिस्सा नहीं ले सकती। वहां पर मौजूद पंडित ये ज्ञान उस महिला अधिकारी को बांट रहे थे जो आईएएस हैं और कार्यकारी तहसीलदार होने के साथ मंदिर अधिकारी भी हैं। इसके बाद रितिका ने अष्टमी पर वहां मौजूद पंडितों को न केवल समानता का पाठ पढ़ाया, बल्कि हवन में भाग भी लिया।
अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन किया जाता है, उनके पैर धुले जाते हैं और उन्हें भोग लगाया जाता है. इन नौ नवरात्रों में देवियों का पूजन किया जाता है. जहां पर महिला आईएएस अधिकारी को हवन करने से रोका गया वो भी देवी का ही दरबार है.

रितिका जिंदल ने कहा कि अष्टमी के दिन हम महिलाओं के सम्मान की बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें उन्हीं के अधिकारों से वंचित रखा जाता है। उन्होंने बताया कि वह सुबह मंदिर में व्यवस्थाओं का जायजा लेने गई थीं। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और पूजा करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन वहां हवन चल रहा था।

उन्होंने वहां मौजूद लोगों से हवन में भाग लेने का आग्रह किया, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उन्हें साफ मना कर दिया और कहा कि जबसे मंदिर में हवन हो रहा है, तबसे किसी भी महिला को हवन में बैठने का अधिकार नहीं है। इस मानसिकता को देखकर उन्हें भारी धक्का लगा और उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं को ऐसी विचारधारा बदलने की आवश्यकता है और इसे वे तभी बदल सकती हैं, जब वे इस रूढ़िवादी सोच का विरोध करेंगी। उन्होंने कहा कि मैं एक अधिकारी बाद में हूं, महिला पहले हूं। महिला होने के नाते ही उन्होंने यह लड़ाई लड़ी है। यह अधिकार हर महिला को मिलना चाहिए।