शिमला। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान छात्रों से नहीं ली गई फीस भी अब निजी स्कूल वसूल सकेंगे। हिमाचल सरकार ने प्रदेश के निजी स्कूलों में सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली के निर्देश वापस ले लिए हैं।

अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार, 27 अक्तूबर को कैबिनेट बैठक में हुए फैसले के बाद शिक्षा सचिव राजीव शर्मा ने उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को पत्र जारी कर दिया है। हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सरकार ने निजी स्कूलों को लॉकडाउन के दौरान बीते महीनों में छोड़ी गई फीस वसूलने की छूट भी दे दी है। 

25 मई, 2020 को कोरोना संकट के चलते सरकार ने निजी स्कूलों में सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली का फैसला लिया था। प्रदेश के निजी स्कूलों के दबाव में आकर अक्तूबर के पहले सप्ताह में उच्च शिक्षा निदेशालय ने फीस को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का सरकार को प्रस्ताव भेजा था। सरकार से पूछा था कि सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली का फैसला जारी रखना है या इसे वापस ले लिया जाए। कैबिनेट बैठक में शिक्षा निदेशालय के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। सरकार ने निजी स्कूलों के दबाव के आगे झुकते हुए सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली का फैसला वापस लेने का निर्णय लिया।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले में स्पष्ट है कि अगर कोई अभिभावक फीस चुकाने में सक्षम नहीं है तो उसे स्कूलों को लिखित में इसकी जानकारी देनी होगी। स्कूल प्रबंधन को एक कमेटी बनाकर इस तरह के मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना होगा। कोर्ट ने कहा है कि निजी स्कूलों को सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद नहीं दी जाती है। फीस ही स्कूल की आय का मुख्य साधन है। ऐसे में फीस को कम नहीं किया जा सकता। स्कूल प्रबंधन ने भी शिक्षकों, गैर शिक्षकों को वेतन देने हैं।

छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि स्कूल फीस के मामले में वादे से सरकार मुकर गई है। कैबिनेट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। अभिभावकों के हित में जल्द मंच रणनीति तैयार करेगा। मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री सहित अन्य कैबिनेट मंत्रियों और अधिकारियों का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में सरकार ने सही पक्ष नहीं रखा, जिसका खामियाजा लाखों अभिभावकों को भुगतना होगा।

ट्यूशन फीस वसूली का फैसला वापस लेने को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की खूब किरकिरी हो रही है। फेसबुक और ट्विटर पर लोगों ने प्रदेश के लाखों अभिभावकों से धोखा देने का आरोप लगाया है।